जब भी भारत की सीमाओं पर दुश्मनों ने आक्रमण किए हैं तब-तब ही पूरे देश में देशभक्ति की लहर दौड़ जाती है और सीमाओं की सुरक्षा करने वाले वीर सैनिकों के प्रति सम्मान और सहयोग प्रदर्शित करने के लिए देश के हर हिस्से में प्रदर्शन और रैलियां निकाली जाती हैं ! परंतु अब ऐसा प्रतीत होता है कि संकट समाप्त होते ही पूरा देश सैनिकों के बलिदानों को भूलता नजर आ रहा है ! अभी हाल ही में देश में कुछ ऐसे मामले सामने आए जहां सेना के सेवारत अधिकारियों और जवानों के साथ नागरिक- प्रशासन,पुलिस ,न्यायपालिका और आम नागरिकों द्वारा अमानवीय व्यवहार किया गया है ! यह सब सैनिकों केआत्मसम्मान और मनोबल को बुरी तरह से प्रभावित करता है !
13 मार्च को ही पंजाब के पटियाला में एक बड़े सेना अधिकारी कर्नेल पुष्पेंद्रसिंहबाथ और उनके पुत्र को12 नशे में मस्त पुलिस कर्मियों द्वारा हिंसक रूप से पीटा गया ! चोटे गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया ! घटना के बाद उनकी पत्नी पुलिस थाने प्राथमिक दर्ज करने गई जहां पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई ! उसके बाद वह पटियाला पुलिस के एसएसपी के पास अपनी फरियाद लेकर गई जहां से उन्हें वापस थाने ही भेज दिया गया ! मामले में काफी शोर शराबा और मीडिया के दखल के बाद ही आखिर में रिपोर्ट लिखी गई ! परंतु अभी तक भी इसमें कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है ! मार्च में ही कर्नाटक के जमखंडी में 9 पैरा कमांडो सेना की यूनिट के अभिमन्युजंगम पर पर नशे में मस्त पुलिस अधिकारी द्वारा हमला किया गया और बिना किसी उचित कारण केउन्हें गिरफ्तार भी किया गया !
इसके बाद हिरासत में बुरी तरह से पीटा गया ! सेना दवारा आर्मी एक्ट की धारा 164 के तहत उनकी जमानत के लिए औपचारिक अनुरोध करने के बावजूद नागरिक अधिकारियों ने काफी कार्रवाई में देरी की और जमानत वाधा डाली ! इसी प्रकार इंदौर मध्य प्रदेश में चार युवा अधिकारियों पर स्थानीय गुंडों द्वारा हमला किया गया ! काफी अनुरोध के बाद ही इन गुंडो के विरुद्ध कोई कार्रवाई हो सकी ! इस प्रकार की घटनाए उड़ीसा ,केरल तथा अन्य राज्यों में भी हुई है ! इस तरह की घटनाओं से देखा जा सकता है किपूरे देश में सैनिकों के प्रति सम्मान कहीं पर दिखाई नहीं दे रहा है !इस प्रकार की घटनाओंसे सैनिकों के परिवार जो ज्यादातर अकेले रहते हैंउनमें असुरक्षा की भावनाए जागृत हो गई है जो सैनिकों के मनोबल को बूरी तरह प्रभावित करती हैं !
आज के सूचना के युग में सारी सूचना सीमाओं पर सैनिकों तक भी पहुंच रही है जिससे वह स्वयं को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं ! यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हमारा देश जो चारों तरफ से चीन, पाकिस्तान और अभी बांग्लादेश जैसे दुश्मनों से घिरा हुआ है उस देश में सुरक्षा कर्मियों के साथ सिविलपुलिस तथा प्रशासन इस प्रकार का व्यवहार कर रहा है !
देश की थल, वायु तथा नौसेना का मुख्य कार्य देश की सीमाओं की सुरक्षा तथा निश्चित करना कि देश के दुश्मन देश की सीमाओं में प्रवेश न कर सके ! इसके लिए हमारे सैनिक दुर्गम पहाड़ों में शून्य से नीचे -40 डिग्री तथा जैसलमेर बाड़मेर के रेगिस्तान में 48 डिग्री तक के तापमान में दिन-रात पहरा देकर उनकी रक्षा करते हैं तथा स्थिति की मांग के अनुसारअपने जीवन का बलिदान देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं ! इसी कारण स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद केवल 1962 केचीनी हमले के अलावा भारतीय सेना ने1947, 65, 71तथा 98 के कारगिल युद्धओ में हर बार विजय ही प्राप्त करके देश का गौरव बढ़ाया है !1962 के युद्ध में भी सेना के कारण पराजय का सामना नहीं करना पड़ा बल्कि इस युद्ध से पहले तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल थिमैया ने भारत सरकार को चीनी हमले की आशंका जताते हुए आधुनिक गोला बारूद तथा हथियारों के लिए आग्रह किया था !
परंतु तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने पंचशील समझौते को दोहराते हुए हिंदी-चीनी भाई-भाई कह कर उनकी मांगों को अस्वीकार कर दिया था ! परंतु इस युद्ध में भी हमारे सैनिकों ने हर मोर्चे पर चीनी हमले का भरपूर जवाब दिया था ! लद्दाख क्षेत्र के रेजंगला में मेजर शैतान सिंह और उनके सैनिकों ने अपनी वीरता और बलिदान से चीनी सैनिकों को आगे बढ़ने से रोक दिया था ! इस युद्ध में भारत के 110 सैनिकों ने चीन के 900 सैनिकों को केवल संगीनो से ही मार दिया था !अक्टूबर 1947 में अचानक पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करने के लिए हमला कर दिया था ! उस समय कश्मीर में राजा हरि सिंह का शासन थाऔर उनकी छोटी सी सेनाइस हमले का मुकाबला नहीं कर पाई इस कारण पाकिस्तान सेना बारामूला तक आ गई जो केवल श्रीनगर से 60 किलोमीटर दूर है !उस समय 26 अक्टूबर की रात में 8:00 बजे राजा हरि सिंह ने भारत में विलय होने का निर्णय लिया इसके बाद रात में ही भारतीय सेना की सिख तथा चार कुमाऊं बटालियनो को को हवाई मार्ग से भारत सरकार ने श्रीनगर पहुंचा दिया था ! 27 अक्टूबर की सुबह इन्होंने जाकर बारामूला में पाकिस्तान सेना केहमले का जवाब दिया और उसके बाद उन्हें पीछे भगाना शुरू कर दिया !इसी युद्ध में श्रीनगर के दूसरे रास्ते बड़गांव पर मेजर सोमनाथ शर्मा की इन्फेंट्री कंपनी तैनात थी ! इस युद्ध से ठीक पहले मेजर सोमनाथशर्मा का एक हाथ एक्सीडेंट में घायल हो चुका था जिस पर प्लास्टर चढ़ा हुआ था !
इसको देखते हुए सेना के नियमों के अनुसार उन्हें युद्ध में भाग न लेने के लिए कहा गया ! परंतु मेजर शर्मा ने युद्ध मेंअपने सैनिकों के साथ लड़ने का अपना दृढ़ निश्चय बताते हुए वहअपने मोर्चे पर डट गए ! मेजर शर्मा की कंपनी अकेले ही उस क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठियों को ढूंढ ढूंढ कर खत्म कर रही थी ! इसी समय उनकी कंपनी को चारों तरफ सेपाकिस्तानयो हमलावरों ने घेर लिया जिसमेंउनकेसारे सैनिक मारे गए और उनका गोला बारूद भी समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया ! इसी समय उनके कमांडर ब्रिग सेन ने उन्हें पीछे हटने के लिए बोला ! मगर मेजर शर्मा नेसाफ इनकार करते हुए कहा कि वे आखिरी गोली तक पीछे नहीं हटेंगेऔर अकेले ही उन्होंने पाकिस्तानियों को तब तक रोक रखा जब तक की पीछे से उनको सहायता नहीं पहुंच गई ! इस युद्ध में हुए वे लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए जिसके लिए उन्हें भारत का पहला परमवीर चक्र प्रदान किया गया ! पाकिस्तान ने 1965 मेंभारत पर दोबारा हमला कर दिया जिसमेंअमृतसर के पास असलउत्तर नाम के मैदान में भारत और पाकिस्तान की सेनाओ मेंआमने-सामने टक्कर हुई !इसमें पाकिस्तान ने तत्कालीनआधुनिक पैटन टेंकों कोअमेरिका से प्राप्त किया था ! जिनका प्रयोग पाकिस्तान की सेना भारत के विरुद्ध इस युद्ध में कर रही थी !
इस मुकाबले में भारतीय सेना की ग्रेनेडियर बटालियन के पास ना तो टैंक थेऔर ना ही कोई ऐसे साधन जिसके द्वारा हमले का जवाब दिया जा सके !परंतु इस बटालियन के हवलदार अब्दुल हमीद ने केवल अपनी आईसीएल तोप सेअकेले ही पाकिस्तान के 21 टेंकों को धराशाई कर दिया था और असल उत्तर के मैदान को पाकिस्तान के टेंकों की कब्र गाह बना दिया था और अंत में वीरगति प्राप्त कर ली ! इस प्रकार पाकिस्तान को इस युद्ध में कारी हार मिली ! इसी प्रकार पाकिस्तान ने बांग्लादेश के युद्ध में जम्मू की सीमा पर टेंकों से हमला किया इसके जवाब मेंभारतीय सेना के केवल 21 साल के लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल नेअपने टेंकों द्वारा इनका मुकाबला बसंतर के मैदान में किया ! इस मुकाबले में खेत्रपाल के टैंक के इंजन में पाकिस्तानी गोला लगा और इंजन खराब हो गया ! इस पर उनके कमांडर ने उन्हें पीछे हटने के लिए बोला परंतु खेत्रपाल नेकमांडर को बोला कि केवल इंजन ही तो खराब हुआ है अभी भी मेरी तोप काम कर रही है ! इस सब के बावजूद उन्होंने पाकिस्तान के चार टैंक इस स्थिति में बर्बाद करकेपाकिस्तानी हमले को नाकाम कर दिया !इस प्रकार केअनेक उदाहरण इस युद्ध मेंभारतीय सेवा ने प्रस्तुत किए हैं !1998 मेंकारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा की यह लाइन काफी लोकप्रिय हुई थी कि यह दिल मांगे मोर- कैप्टन बत्रा पाकिस्तान के मोर्चो पर एक के बाद एक पर विजय प्राप्त कर रहे थे जबकि उस समय उनकी शारीरिक स्थितिस्वस्थ नहीं थी फिर भी पॉइंट 5085जो काफी ऊंची पहाड़ी थी उस परहमले के लिए उन्होंनेअपने आप को प्रस्तुत कर दिया जिसमें उन्होंने काफी संघर्ष के बाद विजय प्राप्त कीऔर आखिर मेंअपने एक सैनिक की जान बचाते हुएवह वीरगति को प्राप्त हुए ! जिसके लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया !
उपरोक्त वर्णन सेयह देखा जा सकता हैकि भारतीय सैनिकों ने हर समय केवल अपने उत्साह वीरता और रदेशभक्ति की भावना से ही दुश्मनों के आधुनिकतम हथियारों का सामना करते हुए उन पर विजय प्राप्त की ! इस प्रकारअपनी मातृभूमि कोदुश्मनों से बचाया ! सैनिकों में इस प्रकार की भावनाओं को जागृत करने में पूरे देशवासियों का भी सहयोगहोता है ! इन भावनाओं कोजागृत करने के लिए देशवासी और देश का शासन तंत्र देश के सैनिकों को उचित सम्मान देकरउनके मनोबल को मजबूत करते हैं ! परंतु यदि उपरोक्त जैसी घटनाएं घटेंगी और सैनिकों काअपमान होगा तो सैनिकों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा ! इसलिए जिन देशों सेना को उचित सम्मान नहीं मिला है उनकी स्वतंत्रता हमेशा खतरे में रही है ! देश को यह नहीं भूलना चाहिए कि विदेशी आक्रांताओं ने दसवीं सदी में भारत पर हमला करके पूरे भारत पर कब्जा लिया था ! इस गुलामी से मुक्ति पाने मेंदेश को पूरे 800 साल लगेऔर देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दिया तब जाकर स्वतंत्रता प्राप्त हुई ! पाकिस्तान सेनाऔर भारतीय सेना का देश के प्रति रवैये बहुत बड़ा अंतर है ! पाकिस्तान की सेना अपनी सेवाओं के बदले पाकिस्तान के संसाधनों का प्रयोग केवल अपने लिए करती है इसी कारण पाकिस्तान के 50% पब्लिक सेक्टर उद्योग पर वहां की सेना का कब्जा है ! इसके साथ ही बहुत सी कृषि भूमि भी वहां के सेना के अधिकारियों के कब्जे में है ! जबकि भारतीय सेना शुरू से ही देश तथा यहां की सरकारों के प्रति उत्तरदाई रही है और निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करती रही है ! भारतीय सेना केवल देशभक्ति देश के प्रति सम्मान तो अपनी मातृभूमि की रक्षा की भावना से अपनी सेवाएं देती है ! जब भी देश में प्राकृतिक आपदा या आंतरिक सुरक्षा में व्यवधान आता है वह अपनी सेवा देकर सामान्य स्थिति स्थापित करके वापस अपनी मुख्य जिम्मेदारी सीमाओं की सुरक्षा के कर्तव्य में लग जाती है !
आजादी के समय से ही चीन और पाकिस्तान से लगने वाली सीमाओं पर हर समय हमले के बादल छाए रहे हैं ! परंतु अब बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से इसकी सीमा पर भी असुरक्षा बढ़ गई है ! इन परिस्थितियों में भारतीय सेना की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ गई है !देश के दुश्मन सीमाओं के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी नए-नए खतरे पैदा कर रहे हैं !पाकिस्तान अक्सर देश में चारों तरफ सांप्रदायिक तनाव फैलाकर दंगो के रूप में अशांति फैलाने की कोशिश करता है ! इसके साथ ही सरकारी नीतियों का विरोध भी करवाता है जैसे नागरिक संशोधन कानून के समय शाहीन बाग धरने प्रदर्शन कराकर किया था !इसी प्रकार चीन भी देश के उत्तर पूर्वी राज्यों मेंअलगाबाद को बढ़ावा देता है ! ऐसी स्थिति में सेना की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है ! इस स्थिति में भारत सरकार को सेना को पर्याप्त सम्मान तथा सुरक्षा प्रदानकरनी चाहिए ताकि पटियाला तथा कर्नाटक जैसी घटनाएं दोबारा ना हो सके ! इसलिए सेना के प्रति सम्मान के लिए देश में जागरूकता बढ़ानी चाहिए तथा सरकार को चाहिए कि सभी राज्यों के लिए ऐसे निर्देश जारी करें जिससे सैनिकों के सम्मान की सुरक्षा हो सके !
विश्व में महाशक्ति बनने के लिए जहां आर्थिकमजबूती आवश्यक है वहीं पर एकउच्च मनोबल वाली शक्तिशाली सेना भी उतनी ही जरूरी है !